पुणे:
महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक 82 वर्षीय बुजुर्ग से 10 करोड़ 74 लाख 65 हजार रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर रोहन रामेश्वर जाधव को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि ठगी की यह पूरी रकम 5435 अलग-अलग बैंक खातों में घुमाई गई थी, ताकि पैसों का सुराग ढूंढना मुश्किल हो जाए।
आरोपी रोहन जाधव, जो सोशल मीडिया पर “रीलस्टार” के नाम से जाना जाता है, पिंपले गुरव इलाके के गजाननगर स्थित एक अपार्टमेंट में रहता है और मूल रूप से छत्रपती संभाजीनगर का निवासी है।

कैसे हुई ठगी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित बुजुर्ग से संपर्क किया और उसे धमकाया कि उसका बैंक खाता एक गंभीर आपराधिक मामले में इस्तेमाल हुआ है, जिसके चलते उसे और उसके परिवार को गिरफ्तार किया जा सकता है। इस डर का फायदा उठाकर आरोपियों ने बुजुर्ग को लगातार धमकाते हुए अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए।
जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज शिकायत और बैंक ट्रांजैक्शन के विश्लेषण के आधार पर इस अंतरराज्यीय साइबर गैंग का पर्दाफाश किया।
पहले भी हो चुकी हैं 4 गिरफ्तारियां
इस मामले में रोहन जाधव से पहले पुलिस चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है:
हर्षद सुभाष धनतोले (26, निवासी कर्वेनगर)
समर्थ सुरेश देशमुख (24)
अमर अत्तरगी (24)
प्रणव करणसिंग आर्या (31, निवासी दिल्ली)
जांच में पता चला कि रोहन जाधव इस पूरे गिरोह का प्रमुख साथी था, और गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहा था।
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर की संलिप्तता ने बढ़ाई चिंता
इस मामले में एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर की गिरफ्तारी ने डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में युवाओं और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि गिरोह ने और किन-किन लोगों को निशाना बनाया और कितने बैंक खातों का इस्तेमाल फर्जी लेनदेन के लिए किया गया।
डिजिटल अरेस्ट से बचाव के लिए सावधानी जरूरी
पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाती। ऐसी किसी भी कॉल या धमकी को गंभीरता से लेने के बजाय तुरंत नजदीकी साइबर पुलिस थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।