क्या है यह नई पहल?
मोदी सरकार जेन-जी यानी युवा पीढ़ी से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए एक बड़ी पहल की तैयारी में है। सरकार की योजना है कि हर दिन एक केंद्रीय मंत्री देश की किसी एक यूनिवर्सिटी में जाकर छात्रों से मुलाकात करे, उनकी चिंताओं को सुने और देश से जुड़े मुद्दों पर उनकी राय समझे।
‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ (One Day, One University) नाम के इस प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत हर बार एक मंत्री को एक तय यूनिवर्सिटी में भेजा जाएगा, जहां वे छात्रों से संवाद करेंगे, विभिन्न विषयों पर उनके विचार सुनेंगे और युवाओं व छात्रों के लिए बनी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देंगे।

छात्र आंदोलन के बाद उठाया गया कदम
यह पहल NEET पेपर लीक मुद्दे को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में सामने आई है। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद जबरदस्त प्रतिक्रिया देखी गई थी, जिसके चलते संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने कार्यवाही बाधित की। छात्र आंदोलन के इसी दौर में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा भी देना पड़ा था।
कैबिनेट बैठक में हुई चर्चा
यह प्रस्तावित पहल बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में भी चर्चा का विषय बनी। सूत्रों के मुताबिक, इस कार्यक्रम को यूनिवर्सिटीज और मंत्रियों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को सौंपी गई है।
कितनी यूनिवर्सिटीज होंगी शामिल?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 1,300 यूनिवर्सिटीज हैं, जिनमें 57 केंद्रीय विश्वविद्यालय और 522 राज्य विश्वविद्यालय शामिल हैं। बाकी डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों की श्रेणी में आते हैं। इतने बड़े पैमाने को देखते हुए यह कार्यक्रम अगर लागू होता है, तो यह छात्रों और सरकार के बीच सीधे संवाद का एक नियमित मंच बन सकता है।
सोशल मीडिया पर भी बढ़ा फोकस
गौरतलब है कि यह पहल प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों से इंस्टाग्राम पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने और रील्स जैसे सोशल मीडिया फॉर्मेट का इस्तेमाल बढ़ाने की अपील के कुछ हफ्तों बाद सामने आई है। बुधवार की कैबिनेट बैठक में मंत्रियों के सोशल मीडिया पोस्ट की पहुंच पर भी चर्चा हुई, जिसमें खासतौर पर युवाओं और जेन-जी तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। यह आकलन इंस्टाग्राम, X (पूर्व में ट्विटर) और फेसबुक पर 1 मई से 15 अगस्त 2026 के बीच की गतिविधि के आधार पर किया गया।
विश्लेषकों की राय — जोखिम भी, संभावना भी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल सरकार को अपनी नीतियों को सीधे संवाद के जरिए छात्रों तक पहुंचाने और जमीनी स्तर पर उनकी चिंताओं को सुनने का एक मंच दे सकती है। शिक्षा विशेषज्ञ और छात्र संगठन इन बातचीत के जरिए परीक्षा प्रणाली, शैक्षणिक अवसरों, रोजगार और शिक्षा की लागत जैसे मुद्दों पर स्पष्टता मांग सकते हैं।
हालांकि, कुछ भाजपा नेताओं ने भी निजी तौर पर आशंका जताई है कि यह पहल उल्टा असर भी डाल सकती है। उनका तर्क है कि पार्टी अब तक बड़े मुद्दों पर ‘एकतरफा संवाद’ पर निर्भर रहती आई है, और सिर्फ मंत्रियों की बातों से युवा पीढ़ी को संतुष्ट कर पाना आसान नहीं होगा।
आगे क्या?
फिलहाल यह पहल प्रस्तावित चरण में है और इसे लागू करने से जुड़ी विस्तृत रूपरेखा — जैसे कार्यक्रम शुरू होने की तारीख, यूनिवर्सिटी चयन की प्रक्रिया और मंत्रियों का शेड्यूल — अभी सामने आना बाकी है। लेकिन इतना साफ है कि छात्रों से सीधा संवाद स्थापित करना सरकार की आगामी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है।
यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है।