तिब्बत से आई तीव्र बाढ़ ने नेपाल में बड़ी तबाही मचाई, कई जिलों में हाई अलर्ट जारी

बुधवार सुबह उत्तरी नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने सीमा के पास के इलाकों में बहुत बड़ी तबाही पैदा कर दी। इसके बाद निचले इलाकों के कई जिलों में हाई अलर्ट लगाया गया। यह बाढ़ स्थानीय समय के अनुसार सुबह लगभग 9 बजे भोटे कोशी नदी में आई और कहा जा रहा है कि यह तिब्बत से आई है।

तिब्बत से आई भीषण बाढ़ ने मचाई नेपाल में तबाही, कई जिलों में हाई अलर्ट जारी

बढ़ते जल स्तर ने रसुवा जिले के तिमुरे और आस-पास के स्याफ्रूबेसी क्षेत्र में बहुत नुकसान पहुँचाया। वहाँ के वाहन, सामान और अन्य चीजें तेज बहाव में खो गईं। नेपाल सेना ने इसकी पुष्टि करते हुए एक बयान दिया। रसुवा जिला काठमांडू के उत्तर-पूर्व में है और तिब्बत सीमा से लगभग 125 किलोमीटर दूर है।

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा जिलों में नदी के किनारे रहने वाले लोगों को हाई अलर्ट पर रहने और अगले आदेश तक ज़रूरी सुरक्षा कदम उठाने का निर्देश दिया। अनुमान है कि बढ़ता जल स्तर बुधवार शाम तक मुगलिंग में मार्स्यांगदी नदी के संगम तक पहुँच सकता है।

रसुवा के सहायक जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि इस बाढ़ का स्तर बेहद बड़ा था और तिमुरे व स्याफ्रूबेसी दोनों बस्तियों को भारी नुकसान पहुँचा। रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र धुंगाना ने बताया कि सीमा शुल्क के परिसर में रखे कई वाहन और सामान बाढ़ में खो गए। साथ ही, हाल ही में बना एक पुल भी बाढ़ से डूब गया।

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, इस आपदा से लगभग 430 मेगावाट की उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई, जिसमें जलविद्युत और सौर ऊर्जा दोनों शामिल हैं। इससे बिजली आपूर्ति में बड़ी बाधा आई है। कई राजमार्ग भी बंद कर दिए गए हैं।

जल विज्ञान के विशेषज्ञों का मानना है कि यह बाढ़ स्थानीय बारिश के बजाय तिब्बत में हुई ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF), यानी हिमनद झील के अचानक फटने के कारण हो सकती है। नेपाल का जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग चीनी अधिकारियों के साथ मिलकर सैटेलाइट डेटा देखकर बाढ़ के सही स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रहा है।

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, रसुवा और आसपास के इलाकों में राहत व बचाव कार्य तेज करने के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक भी बुलाई गई है, जहाँ आगे की ज़रूरी कार्रवाई पर चर्चा होगी।

नेपाल सेना ने त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में खोज व बचाव अभियान के लिए दो हेलीकॉप्टर भेजे हैं। साथ ही, एक MI-17 हेलीकॉप्टर, जो आपातकालीन चिकित्सा बचाव दल से लैस है, त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर रवाना किया गया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री ने बाढ़ प्रभावित पाँचों जिलों के सांसदों से भी राहत व बचाव कार्यों पर चर्चा की। विदेशी दूतावासों ने भी अपने नागरिकों को बाढ़ प्रभावित व उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है।

गौरतलब है कि जून से सितंबर के बीच मानसून की बारिश दक्षिण एशिया में हर साल जानलेवा बाढ़ व भूस्खलन का कारण बनती है। नेपाल का पहाड़ी भूगोल और तिब्बत से सटी सीमा इसे हिमनद झील से जुड़ी आपदाओं के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है।

रसुवा में आई इस अप्रत्याशित बाढ़ ने फिर से हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन व हिमनद झीलों के खतरों को उजागर किया। अभी तक क्षति का पूरा आकलन चल रहा है, और राहत टीमें प्रभावित इलाकों में त्वरित रूप से काम कर रही हैं।

नोट: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। यह एक चल रही घटना है, इसलिए स्थिति स्पष्ट होने के साथ आगे और जानकारी मिल सकती है।

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