नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में बड़ा बदलाव: 600 विशेषज्ञों को हटाया, चार-स्तरीय पेपर जांच प्रणाली लागू की

नई दिल्ली में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बड़ा फेरबदल किया है। भारत की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन और सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी की टीम में यह बदलाव हुआ है। हाल के हफ्तों में परीक्षा संबंधी त्रुटियों और कुप्रबंधन को लेकर हो रही आलोचना के बाद, एजेंसी ने अपनी विशेषज्ञ समिति से 600 सदस्यों को हटाकर नए विशेषज्ञों की नियुक्ति की है।

nta में बड़ा फेरबदल 600 विशेषज्ञ हटाए गए 4 स्तरीय पेपर जांच व्यवस्था लागू

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की अध्यक्षता में हुई एक समीक्षा बैठक में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने मंत्री को अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी। जोशी ने निर्देश दिया कि परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए सभी जरूरी सुरक्षा और अवसंरचनात्मक सुविधाएं बिना देरी के सुनिश्चित की जाएं।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बताया कि प्रश्नपत्रों की समीक्षा को मजबूत करने के लिए एक चार-स्तरीय जांच प्रणाली लागू की जाएगी। यह प्रणाली तथ्यात्मक, टंकण, अनुवाद और विषय-विशेषज्ञता से जुड़ी त्रुटियों को कई चरणों में पकड़ने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसके अलावा अगले दो से तीन हफ्तों में 20-25 नए अधिकारियों की भर्ती भी की जाएगी।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के कार्यालय को अब मिंटो रोड स्थित नए परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां सुरक्षा को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तैनाती के जरिए मजबूत किया जाएगा।

यह कदम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा हाल ही में UGC-NET 2026 के तीन प्रश्नपत्रों — अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र — को रद्द किए जाने के बाद उठाया गया है, जब विशेषज्ञ समीक्षा में इनमें तथ्यात्मक, टंकण, अनुवाद संबंधी और अन्य त्रुटियां पाई गई थीं। इसके बाद एजेंसी ने इन तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा की थी। छात्र संगठनों ने इन त्रुटियों की कड़ी आलोचना की और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, कुछ ने तो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को ही समाप्त करने तक की मांग रख दी।

गौरतलब है कि इससे पहले NEET-UG मेडिकल परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद व्यापक छात्र प्रदर्शन हुए थे, जिसके चलते तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। CBI चार्जशीट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के 13 से अधिक विषय विशेषज्ञों का नाम भी सामने आया था। नए विशेषज्ञ अब प्रश्नपत्र निर्माण, अनुवाद और मनोमिति जैसे क्षेत्रों में काम करेंगे, और एजेंसी साइबर सुरक्षा तथा प्रश्नपत्र डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र से भी विशेषज्ञ नियुक्त करेगी।

नोट: यह रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान और उपलब्ध समाचार स्रोतों पर आधारित है।

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