समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को सुबह-सुबह आजम खान से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित करीब 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के रामपुर और सहारनपुर के अलावा दिल्ली के जामिया नगर में की गई। छापेमारी के दौरान सुरक्षा टीम भी मौजूद रही। यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की जा रही है, और इसे ED के लखनऊ जोनल कार्यालय की टीमें अंजाम दे रही हैं।

जांच का दायरा — सरकारी ठेकों में गड़बड़ी का आरोप
अधिकारियों के अनुसार, यह जांच सरकारी ठेकों के पैसों के कथित दुरुपयोग और डायवर्जन से जुड़ी है। जांच एजेंसी का मानना है कि निजी ठेकेदारों के माध्यम से सरकारी फंड को इस तरह मोड़ा गया कि वह पैसा अंततः ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की संपत्तियां बनाने में इस्तेमाल हुआ। सहारनपुर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, दो कंपनियों और उनके प्रमोटर्स से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली गई, जिनका कथित तौर पर ट्रस्ट से संबंध बताया जा रहा है।
जांचकर्ताओं का कहना है कि कुछ ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच वित्तीय लेन-देन के सबूत मिले हैं। शक है कि सरकारी ठेकों से फायदा उठाने वाले ठेकेदारों ने बड़े “दान” या निर्माण कार्यों के भुगतान के रूप में यह पैसा ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी तक पहुंचाया।
आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी का परिचय
आजम खान ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी हैं, साथ ही उनके कुछ परिजन और करीबी लोग भी इससे जुड़े हैं। ट्रस्ट, मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और रामपुर जिले में एक पब्लिक स्कूल का संचालन करता है।
आजम खान फिलहाल रामपुर जेल में अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ सजा काट रहे हैं।
यूनिवर्सिटी पहले से ही विवादों में
जौहर यूनिवर्सिटी हाल के महीनों में पहले से ही सुर्खियों में रही है। जुलाई 2026 में रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को उसके 40 में से 38 भवन गिराने का निर्देश दिया था। आरोप था कि ये भवन उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम के तहत स्वीकृत नक्शे के बिना बनाए गए थे।
यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था, क्योंकि उन्हें पढ़ाई बाधित होने की चिंता थी। इसके तुरंत बाद मंडलायुक्त ने प्रस्तावित तोड़फोड़ पर रोक लगाते हुए अगले आदेश तक कोई प्रशासनिक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था, जिससे यूनिवर्सिटी को फिलहाल राहत मिली थी।
इसी विवाद के बीच आजम खान की पत्नी तज़ीन फातिमा ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की थी कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए, क्योंकि यह यूनिवर्सिटी जनता के लिए बनाई गई थी और छात्रों व लोगों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
जांच एजेंसियों की पहले से चल रही कार्रवाई
यह पहला मौका नहीं है जब आजम खान और उनके परिवार पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसा हो। इससे पहले आयकर विभाग भी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और मुंबई में कई ठिकानों पर आजम खान और उनके परिवार से जुड़े कर चोरी के मामले में छापेमारी कर चुका है। सूत्रों के मुताबिक, आजम खान के खिलाफ दर्ज दर्जनों आपराधिक मामलों का विवरण भी ED को साझा किया गया था, ताकि मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच की जा सके।
आगे क्या?
फिलहाल जांच एजेंसी वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल सबूत और लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाल रही है, ताकि सरकारी फंड के डायवर्जन और ट्रस्ट-यूनिवर्सिटी की संपत्तियों के निर्माण के बीच सीधा संबंध स्थापित किया जा सके। तलाशी अभियान अभी जारी है, और आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
नोट: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। जांच से जुड़े आरोप अभी प्रारंभिक चरण में हैं, और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।