नई दिल्ली:
देश की प्रमुख आयुर्वेदिक और FMCG कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें कंपनी को अपने कुछ खाद्य उत्पादों पर “100% शुद्ध”, “100% प्राकृतिक” और “100% जैविक” जैसे दावे बंद करने का निर्देश दिया गया था।

क्या है पूरा मामला?
FSSAI के डेज़िग्नेटेड ऑफिसर ने 3 अगस्त, 2026 को एक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर डाबर को शहद, गाय का घी, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, नारियल पानी और नारियल दूध सहित कई उत्पादों की बिक्री तुरंत बंद करने का निर्देश दिया। नियामक का कहना है कि ऐसे “100%” दावे अस्पष्ट हैं, वस्तुनिष्ठ रूप से सत्यापित नहीं किए जा सकते, और उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं।
डाबर को इससे पहले 8 अप्रैल को भी एक उत्पाद पर ऐसे ही दावे को लेकर नोटिस मिला था, जिस पर कंपनी ने जवाब दिया था कि “100% शुद्ध” जैसा कोई दावा संबंधित उत्पाद लेबल पर उपयोग नहीं किया जा रहा।
डाबर की दलीलें
अपनी याचिका में डाबर ने आरोप लगाया कि FSSAI का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और वैधानिक प्रक्रिया के उल्लंघन में जारी किया गया — कंपनी को न तो पूर्व कारण बताओ नोटिस दिया गया, न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। कंपनी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या FSSAI के पास इस तरह से आदेश जारी करने का अधिकार भी है, और तर्क दिया कि “100% प्राकृतिक” व “100% शुद्ध” जैसे शब्द पूरे खाद्य उद्योग में आम तौर पर इस्तेमाल होते हैं, फिर सिर्फ उसके उत्पादों को ही निशाना क्यों बनाया गया।
डाबर ने यह भी कहा कि जिन उत्पादों में केवल एक ही सामग्री (single ingredient) होती है या जो वास्तव में 100% प्राकृतिक सामग्री से बने होते हैं, उनके लिए ऐसे दावे स्वयं में भ्रामक नहीं माने जा सकते। कंपनी ने यह भी रेखांकित किया कि FSSAI ने यह आरोप नहीं लगाया कि उत्पाद मिलावटी, असुरक्षित या घटिया हैं — विवाद केवल लेबलिंग और विज्ञापन के तरीके तक सीमित है।
अदालत में सुनवाई
वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए रखा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है। डाबर ने 3 अगस्त के आदेश को रद्द करने और मामले के निपटारे तक उस पर अंतरिम रोक की मांग की है।
किन उत्पादों पर पड़ सकता है असर?
इस विवाद का असर डाबर के कई लोकप्रिय उत्पादों पर पड़ सकता है, जिनमें शामिल हैं:
- डाबर शहद (Dabur Honey)
- गाय का घी
- वर्जिन नारियल तेल
- तिल का तेल
- एप्पल साइडर विनेगर
- नारियल पानी और नारियल दूध
उपभोक्ताओं और FMCG उद्योग पर क्या होगा असर?
यह मामला केवल डाबर तक सीमित नहीं है। यदि अदालत FSSAI के पक्ष में फैसला देती है, तो भविष्य में कई खाद्य एवं FMCG कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में “100% Pure”, “100% Natural” जैसे दावों को लेकर अधिक सावधानी बरतनी होगी। वहीं अगर फैसला डाबर के पक्ष में आता है, तो इससे इस तरह के दावों के उपयोग को लेकर उद्योग को अधिक स्पष्टता मिल सकती है।
नोट: यह रिपोर्ट न्यायालयी कार्यवाही और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। मामला अभी विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।