नई दिल्ली:
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उस विधेयक को मंजूरी दे दी, जो राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को जानबूझकर बाधित करने या रोकने को अपराध घोषित करता है। इस मंजूरी के साथ ही अब वंदे मातरम् को वही कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है, जो अभी तक केवल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को हासिल था।
राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ अब औपचारिक रूप से कानून बन चुका है।

राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है
इससे पहले राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम केवल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के गायन को जानबूझकर रोकने या उस सभा में विघ्न डालने को अपराध मानता था, जो गान गा रही हो। अब इस संशोधन के जरिए अधिनियम की धारा 3 का दायरा बढ़ाकर उसमें राष्ट्रगीत को भी शामिल कर लिया गया है।
सरकार के बयान के अनुसार, पहले वंदे मातरम् के गायन में विघ्न डालने को लेकर कोई विशेष कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए यह संशोधन लाया गया, ताकि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन को रोके या उस सभा में बाधा डाले जो इसका गायन कर रही हो, तो उसे दंडनीय बनाया जा सके।
संसद में बिल कब पास हुआ
लोकसभा और राज्यसभा में पारित होने की तारीखें
यह विधेयक मानसून सत्र के दौरान 24 जुलाई 2026 को गृह मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में पेश किया गया था। राज्यसभा ने इसे 29 जुलाई को और लोकसभा ने 30 जुलाई को पारित किया। दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया।
कानून तोड़ने पर सजा का प्रावधान
नए संशोधन के तहत जो भी व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के गायन को रोकता है, या ऐसा गायन कर रही किसी सभा में विघ्न डालता है, उसे तीन साल तक की कैद, जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है।
कानून का उद्देश्य केवल जानबूझकर की गई बाधा को दंडित करना है — यह किसी व्यक्ति की चुप्पी या गायन में हिस्सा न लेने को अपराध नहीं मानता।
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पहली बार वंदे मातरम्
गृह मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम् का गायन किया जाएगा। यह इस कानून के लागू होने के बाद पहला बड़ा राष्ट्रीय अवसर होगा जहां वंदे मातरम् को औपचारिक मंच मिलेगा।
वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व
वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 19वीं सदी में की थी, और यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रेरणास्रोत के रूप में उभरा। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को यह स्पष्ट किया था कि वंदे मातरम् को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही सम्मान और दर्जा प्राप्त होगा। इस नए कानून के जरिए संरक्षण के मामले में यह ऐतिहासिक बराबरी अब कानूनी रूप ले चुकी है, हालांकि दोनों गीतों के पद (राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत) पहले जैसे ही अलग-अलग बने रहेंगे।