‘FIR दर्ज कराना सुनिश्चित करें’: मल्लिकार्जुन खरगे ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र, हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में मांगी कार्रवाई

हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर हल्द्वानी के रामलीला मैदान में उनकी जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र, हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में मांगी कार्रवाई

नड्डा को लिखे इस पत्र में खरगे ने राज्यसभा में सदन के नेता द्वारा पहले दिए गए आश्वासन की याद दिलाते हुए, उनसे उत्तराखंड सरकार को कार्रवाई के लिए निर्देशित करने का आग्रह किया।

अपने पत्र में खरगे ने इस बात पर जोर दिया कि घटना को 24 दिन बीत जाने के बावजूद, इसके लिए कथित तौर पर जिम्मेदार व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है।

खरगे ने लिखा, “यह मुद्दा मेरी व्यक्तिगत स्थिति या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर मेरे पद से कहीं आगे बढ़कर है; यह व्यापक स्तर पर करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है, जो हर दिन इस क्रूर वास्तविकता का सामना करते रहते हैं। ऐसे दोषियों को सबक सिखाना जरूरी है।”

खरगे ने नड्डा से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को निर्देशित करें, ताकि हल्द्वानी में उनकी जनसभा के बाद रामलीला मैदान में हुई कथित शुद्धिकरण की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई जा सके।

उन्होंने लिखा, “इन तथ्यों और राज्यसभा में दिए गए आश्वासन के मद्देनजर, आपको उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देना चाहिए कि हल्द्वानी में मेरी जनसभा के बाद रामलीला मैदान में हुई शुद्धिकरण की घटना में शामिल व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।”

गौरतलब है कि यह विवाद 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले, 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस रैली के बाद शुरू हुआ था। रैली के बाद एक दक्षिणपंथी संगठन के सदस्यों ने वहां शुद्धिकरण अनुष्ठान किया था, जिसकी कांग्रेस नेताओं ने कड़ी आलोचना की थी।

खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में भी उठाया था, आरोप लगाया था कि यह अनुष्ठान उनकी दलित नेता के तौर पहचान से जुड़ा था, और सवाल किया था कि क्या लोकतंत्र में इस तरह की प्रथाएं स्वीकार्य हैं।

वहीं भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि इस घटना का “कोई जातिगत पहलू नहीं” है, और कांग्रेस पर हिंदू समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया था।

गौरतलब है कि 30 अगस्त को इसी शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर राहुल गांधी के बयानों पर उनके खिलाफ पहले ही एक FIR दर्ज की जा चुकी है। यह FIR वाल्मीकि समुदाय के सदस्य अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज हुई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। पुलिस ने इस मामले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) और 3(1)(u) के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 भी लगाई थी।

इससे पहले राहुल गांधी ने इस शुद्धिकरण अनुष्ठान को “अस्पृश्यता का ही एक और नाम” बताते हुए इसमें शामिल लोगों के खिलाफ FIR की मांग की थी, और इस कृत्य को संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया था।

हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद अब एक जटिल कानूनी और राजनीतिक मामला बन चुका है, जिसमें एक ओर राहुल गांधी के बयान पर उनके खिलाफ ही FIR दर्ज हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर खरगे शुद्धिकरण अनुष्ठान में शामिल लोगों के खिलाफ भी FIR दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और घटनाक्रम सामने आने की उम्मीद है, खासकर उत्तराखंड सरकार और भाजपा नेतृत्व की प्रतिक्रिया को लेकर।

नोट: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। यह एक संवेदनशील राजनीतिक-सामाजिक मामला है, जिस पर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top