बिंदुखत्ता/ नैनीताल | ENewsxpress Desk:
बिंदुखत्ता राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर सुर्खियों में है। नैनीताल जिले के इस क्षेत्र में 27 सितंबर को एक विशाल महारैली आयोजित करने का ऐलान किया गया है। यह मांग वर्षों पुरानी है और अब स्थानीय संगठन इसे लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज़ करने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इस आंदोलन से जुड़ी पूरी जानकारी।

आखिर क्यों उठी बिंदुखत्ता राजस्व गांव की मांग?
राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की मांग के पीछे बड़ी वजह है। यहां करीब एक लाख की आबादी निवास करती है, लेकिन दशकों बाद भी इसे यह दर्जा नहीं मिल पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी ज़मीन को लंबे संघर्ष के बाद हासिल किया है, और नगर पालिका क्षेत्र का दर्जा मिलने से उनकी ज़मीन नज़ूल भूमि में तब्दील हो जाएगी, जिसके लिए उन्हें भारी रकम चुकानी पड़ सकती है।
वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की सारी कागज़ी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक सरकार की ओर से अधिसूचना जारी नहीं की गई है, जिसके चलते ग्रामीणों में लंबे समय से नाराज़गी बनी हुई है। पिछले तीन मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
27 सितंबर की महारैली से जुड़ी बिंदुखत्ता राजस्व गांव आंदोलन की तैयारी
बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले 27 सितंबर को एक बड़ी महारैली आयोजित की जाएगी, जो बिंदुखत्ता राजस्व गांव आंदोलन का एक अहम पड़ाव मानी जा रही है। इससे पहले भी इसी साल फरवरी में हजारों ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय तक जुलूस निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा था।
इस आंदोलन को मज़बूत करने के लिए बीते महीनों में वन अधिकार संगठन का विस्तार भी किया गया है, जिसमें भूतपूर्व सैनिक संगठन और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है ताकि बिंदुखत्ता के सभी 32 गांवों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
Read More: CM Dhami Directs Quick Work on Rani Bagh-Bhimtal Ropeway Project
बिंदुखत्ता राजस्व गांव को लेकर ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- बिंदुखत्ता को नगर पालिका क्षेत्र की बजाय राजस्व गांव घोषित किया जाए
- वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत पूरी हो चुकी प्रक्रिया पर तुरंत अधिसूचना जारी हो
- ज़मीन को नज़ूल भूमि में तब्दील न किया जाए
- सरकार की पिछली घोषणाओं को अमल में लाया जाए
अब तक का घटनाक्रम: बिंदुखत्ता राजस्व गांव आंदोलन कैसे आगे बढ़ा?
- यह मांग वर्षों से लंबित है और कई बार सड़कों पर आंदोलन हो चुका है
- फरवरी 2026 में तहसील कार्यालय तक बड़ी महारैली निकाली गई थी
- अप्रैल 2026 में वन अधिकार समिति का विस्तार कर नया संगठन बनाया गया
- अब 27 सितंबर को फिर से बड़े स्तर पर महारैली की तैयारी की जा रही है
निष्कर्ष
बिंदुखत्ता राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। 27 सितंबर की महारैली इस आंदोलन के लिए एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:
1. बिंदुखत्ता राजस्व गांव को लेकर 27 सितंबर की रैली क्यों आयोजित की जा रही है?
यह रैली बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की लंबित मांग को लेकर आयोजित की जा रही है।
2. क्षेत्र में कितनी आबादी निवास करती है?
बिंदुखत्ता में करीब एक लाख की आबादी निवास करती है।
3. राजस्व गांव की मांग के पीछे ग्रामीणों की मुख्य चिंता क्या है?
ग्रामीणों का कहना है कि नगर पालिका क्षेत्र का दर्जा मिलने से उनकी ज़मीन नज़ूल भूमि में तब्दील हो जाएगी और उन्हें भारी रकम चुकानी पड़ेगी।
4.राजस्व गांव आंदोलन किसके बैनर तले चलाया जा रहा है?
यह आंदोलन बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम संयुक्त संघर्ष समिति और वन अधिकार संगठन के बैनर तले चलाया जा रहा है।
5. क्या सरकार ने पहले भी राजस्व गांव की मांग पर कोई आश्वासन दिया है?
हाँ, अलग-अलग समय पर तीन मुख्यमंत्रियों ने इस संबंध में घोषणाएं की थीं, लेकिन अब तक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
नोट: यह लेख स्थानीय समाचार रिपोर्ट्स और पूर्व की घटनाओं के आधार पर तैयार किया गया है।
रैली से जुड़े ताज़ा और आधिकारिक अपडेट के लिए स्थानीय प्रशासन या मूल समाचार स्रोत ज़रूर देखें।