देहरादून | eNewsXpress Desk
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें सड़क सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल उठे हैं। प्रेमनगर क्षेत्र में जो हादसा हुआ, उसमें घायल लोगों को लगभग 45 मिनट तक सड़क पर रहना पड़ा। आरोप है कि परिवहन विभाग के कर्मचारी घायलों की मदद के बजाय दो पक्षों के बीच समझौता कराने में लगे रहे।
मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। अब घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

घायल लोग सड़क पर तड़पे
देहरादून के प्रेमनगर में एक सड़क हादसा हुआ था। कुछ लोग घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल मदद की जरूरत थी। लेकिन घायल लोगों को लगभग 45 मिनट तक सड़क पर रहना पड़ा।
इस तरह के मामले में पहली प्राथमिकता घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और जल्द चिकित्सा सुविधा देने की होती है। लेकिन अब यह सवाल उठ रहा है कि परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने अपना कर्तव्य कैसे पूरा किया।
इंटरसेप्टर स्टाफ पर आरोप लगे
इस घटना में आरोप है कि परिवहन विभाग के इंटरसेप्टर स्टाफ ने हादसे के बाद घायलों की मदद के बजाय दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने पर ध्यान दिया।
अब जांच की जा रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि कर्मचारियों ने क्यों अपनी जिम्मेदारी पूरा नहीं की और घायलों को मदद क्यों नहीं मिल सकी।
जांच के बाद जिम्मेदारी तय होगी
जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच में घटनास्थल पर मौजूद कर्मचारियों की भूमिका और उनके कदम देखे जाएंगे।
अगर जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सड़क हादसों में पहले घंटे का महत्व
हादसे के बाद सबसे पहला घंटा घायल व्यक्ति के लिए बेहद अहम होता है। जल्द चिकित्सा सहायता मिलने से उसकी जान बचाई जा सकती है।
इसलिए, हादसे के बाद मौजूद सभी अधिकारियों या कर्मचारियों की पहली प्राथमिकता घायल व्यक्ति की मदद होनी चाहिए।
हादसा से कई सवाल खड़े हुए
यह घटना सड़क हादसों के बाद सरकारी तंत्र की भूमिका पर सवाल खड़े करती है। अगर कोई अधिकारी हादसे के बाद मौजूद होता है तो क्या उसकी पहली प्राथमिकता घायल व्यक्ति की मदद होनी चाहिए?
अब जांच के बाद ही इस बारे में स्पष्टता मिलेगी कि हादसे के बाद क्या हुआ और घायलों को मदद मिलने में इतनी देरी क्यों हुई।
निष्कर्ष
देहरादून के प्रेमनगर में हुआ यह हादसा सड़क सुरक्षा और बचाव व्यवस्था के सवाल खड़े करता है। घायलों को लंबे समय तक मदद का इंतजार करना एक गंभीर समस्या है। अब जांच के बाद ही यह पता चलेगा कि परिवहन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका क्या रही और इस मामले में किसकी जिम्मेदारी है।