यूपी में चीनी की जमाखोरी पर योगी सरकार सख्त, डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा तय

उत्तर प्रदेश में चीनी के भाव में हो रही बढ़ोतरी और उसके पीछे छिपे कालाबाजारी के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सख्त फैसला किया है। लखनऊ में हुई एक बैठक में उन्होंने चीनी की उपलब्धता और भंडारण को लेकर अधिकारियों को आदेश दिए।

चीनी की कालाबाजारी पर सीएम योगी का एक्शन, गोदामों का होगा सत्यापन

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में चीनी की कोई कमी नहीं है। लोग चिंतित न हों। उन्होंने अफवाह फैलाने वालों और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी डीलर 400 टन चीनी से ज्यादा नहीं रख सकता है। और 30 दिन से ज्यादा चीनी भंडारित नहीं कर सकता है।

यह नियम 1 अगस्त से लागू हो गया है। उन डीलरों के पास जो पहले से अधिक चीनी थी, उन्हें 1 अगस्त तक अतिरिक्त चीनी को बेच देना था।

बड़े उपभोक्ताओं के लिए भी स्टॉक की सीमा तय की गई है। जो लोग हर महीने 10 मीट्रिक टन या उससे ज्यादा चीनी का उपभोग करते हैं, वे 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी नहीं रख सकते हैं।

यह नियम 1 सितंबर से लागू होगा। इसके अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकार, जैसे अधिकारी इस नियम से छूट के हैं।

चीनी मिलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे बेची गई चीनी को 7 दिन तक गोदाम में रख नहीं सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिलों में चीनी मिलों और डीलरों के गोदामों का भौतिक सत्यापन कराएं।

अगर किसी डीलर या चीनी मिल के पास तय सीमा से ज्यादा चीनी है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री को बताया गया कि प्रदेश में चीनी मिलों में अब तक 179.38 लाख क्विंटल चीनी है। यह मांग के हिसाब से पर्याप्त है। हर महीने लगभग चार लाख टन चीनी की खपत होती है।

आगामी पेराई सत्र में उत्तर प्रदेश में करीब 28.14 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती होने की उम्मीद है। इससे लगभग 90 लाख टन चीनी उत्पादन हो सकता है।पिछले सीजन में 48 लाख से अधिक किसानों को गन्ना मूल्य के रूप में 32,554 करोड़ रुपये दिए गए।

हाल के महीनों में चीनी की कीमत 39 से 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी जमाखोरी और सट्टेबाजी के कारण हुई है।

योगी सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले जमाखोरी रोकने के लिए यह कदम उठाया है। डीलरों के लिए 400 टन और बल्क उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन की सीमा तय की गई है।

नोट: यह नियम बाजार में कृत्रिम कमी रोके और आम लोगों को सस्ते भाव में चीनी उपलब्ध कराए। प्रशासन अब गोदामों की निगरानी करेगा।

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