हल्द्वानी में गुलदार हमला: कालाढूंगी में 10 साल के अंश की हिम्मत से बची जान

हल्द्वानी में गुलदार हमला की यह खबर इन दिनों पूरे कुमाऊं में चर्चा का विषय बनी हुई है। कालाढूंगी के विजयपुर गांव में शनिवार शाम करीब साढ़े सात बजे तेंदुए ने दस वर्षीय अंश पर झपट्टा मार दिया। बच्चे की हिम्मत और लोगों के शोर के आगे गुलदार को पीछे हटना पड़ा।अगर आप ENewsxpress में जानना चाहते हैं कि पूरा मामला क्या है, वन विभाग ने क्या कहा और ग्रामीण क्या मांग कर रहे हैं, तो यह रिपोर्ट पूरी पढ़ें।

कालाढूंगी में 10 साल के अंश की हिम्मत से बची जान शोर मचाने पर भागा तेंदुआ

पूरा मामला क्या है: हल्द्वानी में गुलदार हमला

रिपोर्ट्स के मुताबिक अंश शनिवार शाम दुकान से सामान लेकर घर लौट रहा था, तभी गुलदार ने अचानक उस पर हमला कर दिया। गुलदार का पंजा बच्चे के चेहरे और आंख के पास लगा। यह घटना हल्द्वानी से सटे कालाढूंगी क्षेत्र (जिला नैनीताल) के विजयपुर गांव की है, जो जंगल के काफ़ी नज़दीक है। इसीलिए शाम ढलने के बाद यहां खतरा ज़्यादा रहता है।

अंश ने कैसे बचाई अपनी जान?

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार अंश ने घबराने के बजाय ज़ोर-ज़ोर से शोर मचाया और दोनों हाथों से गुलदार की गर्दन पकड़ ली। उसकी चीख सुनकर पास के दुकानदार कुंदन टॉर्च लेकर दौड़े, और लोगों के शोर मचाने पर गुलदार बच्चे को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। अंश को चेहरे पर चोटें आई हैं, लेकिन समय पर मदद मिलने से उसकी जान बच गई।

वन विभाग का बयान और मुआवजा

गदगदिया रेंज के वन क्षेत्राधिकारी जगदीश जोशी ने बताया कि विभाग को घटना की जानकारी है और अंश का इलाज कराया गया है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार उपचार के बाद पीड़ित को मुआवजा भी दिया जाएगा। रविवार को वन विभाग के डीएफओ बच्चे के घर पहुंचे और उसका हालचाल जाना।

हल्द्वानी में गुलदार हमला: गांव में दहशत और ग्रामीणों की मांग

हमले के बाद विजयपुर गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण शाम होते ही घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। घटना के बाद गुलदार का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह घर के पास आराम से बैठा नज़र आ रहा है। लोगों ने इलाके में गश्त बढ़ाने और गुलदार को पकड़ने की मांग की है।

हल्द्वानी में गुलदार हमला ही नहीं, बेरीपड़ाव में भी गुलदार की दस्तक

सिर्फ़ विजयपुर ही नहीं, हल्द्वानी के आसपास दूसरे इलाकों में भी गुलदार की हलचल दिख रही है। हल्द्वानी के बेरीपड़ाव क्षेत्र में देर रात गुलदार ने एक पालतू कुत्ते को अपना शिकार बना लिया। इससे साफ़ है कि जंगल से सटी कॉलोनियों में रहने वालों को अब और सतर्क रहने की ज़रूरत है।

हल्द्वानी में गुलदार जैसी घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं?

उत्तराखंड के तराई और भाबर इलाकों में जंगल और बस्ती की सीमा बहुत करीब है। गुलदार अक्सर भोजन की तलाश में आबादी के पास आ जाते हैं, जहां उन्हें कुत्ते, बकरी और मवेशी आसानी से मिल जाते हैं। खुले में पड़ा कूड़ा और झाड़ियों से घिरे रास्ते भी इस खतरे को बढ़ाते हैं। यही वजह है कि शाम और रात के समय ऐसी घटनाएं ज़्यादा सामने आती हैं।

हल्द्वानी में गुलदार हमला जैसी घटनाओं से बचने के उपाय

  • शाम और रात में बच्चों को अकेले बाहर न भेजें, खासकर जंगल से सटे इलाकों में।
  • बाहर निकलते समय टॉर्च साथ रखें और आपस में बात करते हुए चलें।
  • गुलदार दिखे तो भागें नहीं। शांत रहकर धीरे-धीरे पीछे हटें और ज़ोर से शोर मचाएं।
  • पालतू कुत्तों, बकरियों और मवेशियों को रात में सुरक्षित बाड़े में रखें।
  • घर के आसपास झाड़ियां और कूड़ा जमा न होने दें।
  • गुलदार दिखने या हमले की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:

Q1. हल्द्वानी में गुलदार हमला की यह घटना कहां हुई?
यह घटना नैनीताल जिले के कालाढूंगी क्षेत्र के विजयपुर गांव में हुई, जो हल्द्वानी से सटा इलाका है।

Q2. हमले में घायल बच्चे का नाम क्या है?
बच्चे का नाम अंश है और उसकी उम्र 10 साल है।

Q3. क्या पीड़ित परिवार को मुआवजा मिलेगा?
वन विभाग के अनुसार नियमों के तहत इलाज के बाद मुआवजा दिया जाएगा।

Q5. गुलदार दिखे तो किसे सूचना दें?
नज़दीकी वन विभाग कार्यालय या रेंज अधिकारी को तुरंत सूचना दें।

निष्कर्ष

अंश की हिम्मत और गांव वालों की तत्परता ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। फिर भी हल्द्वानी में गुलदार हमला जैसी घटनाएं बताती हैं कि जंगल से सटे इलाकों में गश्त, निगरानी और जागरूकता बढ़ाना ज़रूरी है।

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