देहरादून:
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में एक तायक्वोंडो खिलाड़ी छात्रा के भावुक बयान से बड़ा राजनीतिक बवाल हो गया। कार्यक्रम में उपस्थित छात्रा ने अपनी बात रखी कि नेशनल स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला था, लेकिन वह ₹1.5 लाख के खर्च के कारण नहीं जा सकी।

कार्यक्रम में क्या हुआ?
10 अगस्त को देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में CNI गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्रा शायरा ने खड़े होकर अपनी बात रखी। उसने कहा, “मुझसे 1.5 लाख रुपये मांगे गए, जिसकी वजह से मैं इंटरनेशनल खेल नहीं पाई।” इतना कहते-कहते वह भावुक हो गई। मुख्यमंत्री धामी ने उसे सांत्वना देते हुए कहा, “चलो-चलो बेटा, बैठ जाओ,” और मौजूद अधिकारियों को छात्रा के स्कूल की जांच करने का आदेश दिया।
कांग्रेस ने उठाया मुद्दा
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार में खेल व्यवस्था में भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए अपने हैंडल से साझा किया। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग को बाद में सरकार, मुख्यमंत्री और भाजपा के सोशल मीडिया अकाउंट्स से हटा दिया गया।
छात्रा ने बाद में दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद शायरा ने एक और वीडियो जारी कर अपना स्पष्टीकरण दिया। उसने बताया कि वह हाल ही में जम्मू में हुई नेशनल चैंपियनशिप में शामिल हुई थी, जहां उसे रोमानिया में होने वाली एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चुना गया। उसके अनुसार, आयोजक संस्था लगभग ₹1.7 लाख का खर्च वहन करने को तैयार थी, जबकि शेष ₹1.5 लाख की व्यवस्था उसे खुद करनी थी। उसने यह भी कहा कि इस बारे में उसने अपने स्कूल या किसी अन्य को जानकारी नहीं दी थी, जिस वजह से वह समय पर व्यवस्था नहीं कर सकी और मौका चूक गई। गौरतलब है कि पहले बयान में उसने खुद इसे “रिश्वत” या “भ्रष्टाचार” नहीं कहा था और न ही किसी व्यक्ति विशेष का नाम लिया था।
अब भी बने हुए हैं कुछ सवाल
छात्रा के स्पष्टीकरण के बावजूद इस घटना ने कुछ महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं—खासकर यह कि आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले परिवारों से आने वाले युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चुने जाने के बाद किस तरह की सहायता दी जाती है, और क्या देश का प्रतिनिधित्व करने की लागत खुद खिलाड़ी पर ही आ जाती है।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध वीडियो बयानों और समाचार स्रोतों पर आधारित है। छात्रा एक नाबालिग है, इसलिए रिपोर्टिंग में संयम और संवेदनशीलता बरती गई है। मामले की जांच की स्थिति पर आगे की जानकारी सामने आने पर अपडेट किया जाएगा।