चमोली / उत्तराखंड | ENewsxpress Desk :
क्या है यह उपलब्धि?
उत्तराखंड के चमोली जिले की धाविका भागीरथी बिष्ट ने रविवार को हैदराबाद में हुई NMDC हैदराबाद मैराथन के 15वें संस्करण में महिलाओं की फुल मैराथन (42.195 किमी) में रजत पदक जीतकर उत्तराखंड का नाम फिर से रोशन किया। ‘फ्लाइंग गर्ल’ के नाम से जानी जाने वाली भागीरथी की यह जीत पूरे प्रदेश में खुशी और गर्व लेकर आई।
इस रेस को भारत की दूसरी सबसे बड़ी मैराथन माना जाता है। इसमें फुल मैराथन, हाफ मैराथन (21.097 किमी), 10 किमी और 5 किमी फन रन जैसी कई कड़ी शामिल थीं। रेस की शुरुआत हैदराबाद के नेकलेस रोड पर स्थित पीपुल्स प्लाजा से हुई।

चमोली के दूरस्थ गांव से निकली प्रतिभा
भागीरथी बिष्ट चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के दूरस्थ गांव वाण में रहती हैं। जब वे तीन साल की थीं, तब उनके पिता का अचानक निधन हो गया, पर फिर भी भागीरथी ने हार नहीं मानी। कम संसाधन और कठिन माहौल में, उन्होंने पहाड़ी पगडंडियों पर दौड़ना शुरू किया, जिससे वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धाविका बन पाईं।
भागीरथी पाँच भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं और अब पौड़ी के रांसी स्टेडियम में नियमित अभ्यास करती हैं।
पिछली उपलब्धियां भी रही हैं शानदार
यह हैदराबाद मैराथन में भागीरथी के लिए नई उपलब्धि नहीं है। पिछले साल (2025) उन्होंने उसी मैराथन में स्वर्ण पदक जीता था, 2 घंटे 51 मिनट में दौड़ पूरी करके पहला स्थान प्राप्त किया था, और उन्हें 3 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी मिली थी।
फरवरी 2026 में हुई 11वीं कॉग्निजेंट न्यू दिल्ली मैराथन में भी भागीरथी ने महिलाओं की फुल मैराथन में 2 घंटे 43 मिनट 28 सेकंड का समय लेकर रजत पदक जीता। इससे पहले वह ईरान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हाफ मैराथन में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और देश के कई हिस्सों में आयोजित प्रतियोगिताओं में पहले स्थान पर रही हैं।
कोच की भूमिका अहम
भागीरथी की सफलता में उनके कोच सुनील शर्मा का भी बड़ा योगदान रहा है। वह हिमाचल प्रदेश के सिरमौर से हैं और स्वयं एक अंतरराष्ट्रीय मैराथन धावक रहे हैं। कोच शर्मा ने हमेशा भागीरथी की मेहनत, संयम और आत्मविश्वास की सराहना की है, और मानते हैं कि सही मार्गदर्शन से वह और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगी।
ओलंपिक है अगला बड़ा लक्ष्य
भागीरथी बिष्ट का सपना है कि वह ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतें। इस लक्ष्य के लिए वह रांसी स्टेडियम में दिन-रात कड़ी मेहनत कर रही हैं। पहाड़ों की कठिनाई और संघर्ष से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुँचने वाली भागीरथी की कहानी उत्तराखंड के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए बड़ी प्रेरणा बन गई है।
निष्कर्ष
हैदराबाद मैराथन में भागीरथी बिष्ट का यह प्रदर्शन फिर से दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है। उत्तराखंड की यह ‘फ्लाइंग गर्ल’ अब अपने नजरों को आने वाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर केंद्रित कर चुकी है, और आशा है कि वह भविष्य में देश के लिए और भी गौरव लेकर आएंगी।
नोट: यह लेख उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।