हल्द्वानी/नई दिल्ली | eNewsXpress Desk
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाते हुए घटना पर नाराजगी जताई और इसे अपने प्रति भेदभाव से जोड़कर सवाल खड़े किए।
वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी का इस तरह की गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। भाजपा की ओर से रैली के दौरान कथित तौर पर लगाए गए नारों से धार्मिक भावनाएं आहत होने का दावा भी किया गया है।

क्या है पूरा मामला?
मामला हल्द्वानी के रामलीला मैदान का है, जहां 8 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक सार्वजनिक रैली को संबोधित किया था। यह रैली उत्तराखंड में कांग्रेस की आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
रैली के कुछ दिनों बाद रामलीला मैदान में एक संगठन की ओर से कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ यज्ञ किया गया। संगठन की ओर से दावा किया गया कि राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान मंच से आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे और रामलीला मंच को राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
खरगे ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस घटना को राज्यसभा में उठाते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यक्रम के बाद जिस तरह से मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, वह उनके प्रति भेदभावपूर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
खरगे के बयान के बाद यह मामला संसद में भी राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने घटना की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि शुद्धिकरण करने वाले लोगों के भाजपा से संबंध हैं। कांग्रेस ने इस घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए इसे शर्मनाक बताया और कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस का आरोप है कि खरगे के दलित समुदाय से होने के कारण उनके कार्यक्रम के बाद इस तरह का शुद्धिकरण किया गया। हालांकि, भाजपा से संगठन के कथित संबंधों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा ने आरोपों से किया इनकार
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि भाजपा का शुद्धिकरण करने वाले संगठन से कोई संबंध नहीं है।
भाजपा नेताओं ने इसके बजाय रैली के दौरान कथित तौर पर लगाए गए नारों पर सवाल उठाया और दावा किया कि इससे सनातन समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए पार्टी को बदनाम करने का आरोप लगाया।
जेपी नड्डा ने जांच का भरोसा दिया
राज्यसभा में मामला उठने के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस मामले की जांच का आश्वासन दिया। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि शुद्धिकरण कार्यक्रम में शामिल लोगों का भाजपा से वास्तव में कोई संबंध था या नहीं और पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता क्या है।
चुनावी माहौल के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद
हल्द्वानी की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। खरगे की रैली को कांग्रेस के चुनावी अभियान की शुरुआत के तौर पर भी देखा गया।
रैली में खरगे ने युवाओं को रोजगार और बिना भ्रष्टाचार तथा पक्षपात के सरकारी अवसर उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया था।
अब ‘शुद्धिकरण’ विवाद के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
निष्कर्ष
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे की रैली के बाद हुए कथित शुद्धिकरण ने उत्तराखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ रही है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों से इनकार किया है और रैली में कथित आपत्तिजनक नारों का मुद्दा उठाया है।
अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शुद्धिकरण कार्यक्रम के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसमें शामिल लोगों का किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध था या नहीं।